Showing posts with label damdar bhojpuria. Show all posts
Showing posts with label damdar bhojpuria. Show all posts

Sunday, 8 February 2015

भरत शर्मा ’ब्यास‘- दमदार

भरत शर्मा ’ब्यास‘- (१४)
63 वर्ष, गायक



सामाजिक प्रतिबद्धता

भोजपुरी लोकगीत के सम्राट कहे जाने वाले भरत शर्मा ’ब्यास‘ पिछले 40 सालों से भोजपुरी गीत-संगीत के धुरी बने हुए है। उन्होंने अब तक सैकड़ों अलबम एवं फिल्मों में गाने गाये है एवं कुछ भोजपुरी फिल्मों में अभिनय भी किया है।

बिहार के बक्सर जिले में 1 अगस्त 1951 को महान गायक भरत शर्मा का जन्म हुआ था।

आलोचनाः
वह अपने गुस्से पर काबु नहीं रख पाते है और किसी दुसरे के कहे में आ जाते है।

Friday, 6 February 2015

डाॅ. सरिता बुद्धृ - दमदार भोजपुरिया

डाॅ. सरिता बुद्धृ  - (८)
60 वर्ष, अंतरराष्ट्रीय

अंतरराष्ट्रीय दीदी


अंतरराष्ट्रीय दीदी के तौर पर दुनिया में फेमस स्काॅलर डाॅ. सरिता बुद्धू अपनी लेखन एवं भोजपुरी भाषा के उत्थान के लिए समर्पित हैं। वे बहुमुखी प्रतिभा की धनी हैं। उन्होंने कोलकत्ता विश्वविद्यलय से भूगोल में स्नातक की उपाधि प्राप्त की तथा जर्मनी और फ्रांस में पत्रकारिता से संबंधित उच्च शिक्षा भी प्राप्त की हैं। उन्होंने हिंदी में एम.ए. भी किया है। पूर्व में वे शिक्षा और वैज्ञानिक अनुसंधान मंत्रालय (माॅरीशस)  में विश्व हिंदी सचिवालय की सलाहकार की भूमिका सफलतापूर्वक निभा चुकी हैं।

उन्होंने छोटी उम्र में ही अपने जीवन को माॅरीशस के सामाजिक, आर्थिक एवं सांस्कृतिक विकास के लिए समर्पित कर दिया। उन्होंने भारत के भोजपुरी क्षेत्र की नेपाल और भारतीय वाड़्मय में विस्तृत खोज की और वेस्टइंडीज, संयुक्त राष्ट्रसंघ, यूरोप, यूके एवं अफ्र्रीका में भारतीय संस्कृति पर व्याख्यान दिए। सन् 1996 से 2001 के मध्य माॅरीशस में स्थित विश्व हिंदी सचिवालय की स्थापना करने में उन्होंने महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। उनकी पुस्तक ’कन्यादानः हिंदू विवाह प्रथा से संबंधित प्रश्न’ ने अंतरराष्ट्रीय स्तर पर प्रसिद्धि पाई है। उन्होंने अंतरराष्ट्रीय स्तर की कई किताबे लिखी है, जो भोजपुरी भाषा, साहित्य एवं संस्कार प्रचार-प्रसार में सहायक साबित हुई हैं। जिसमें ’माॅरीशस की भोजपुरी परंपराएँ, भोजपुरी व्याकरण एवं भोजपुरी कैसे सीखे आदि महत्वपूर्ण पुस्तके है। 

अक्टूबर-नवम्बर 2014 अंतरराष्ट्रीय भोजपुरी महोत्सव का उन्होंने सफल आयोजन किया, जिसमें कई देशों के प्रतिनिधी शामिल हुए। 

आलोचनाः
अपनी या परिवार की परवाह किये बगैर भोजपुरी के प्रचार-प्रसार के लिए महीनों घर से बाहर रहती है, जिससे उनके सेहत पर विपरीत असर पड़ता है।