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Sunday, 20 September 2015

लंदन में होगा बीफा(BIFA) अवार्ड

 मुम्बई। भोजपुरी इंटरनेशनल फिल्म अवार्ड (BIFA) समारोह अब लन्दन में संपन्न होगा। जैसा की विदित है की इसी वर्ष जून माह में प्रथम बीफा समारोह मॉरीशस में संपन्न हुआ था। जिसकी अपार सफलता के बाद अब बीफा समारोह लंदन में आयोजित करने की कवायद शुरू हो चुकी है। समारोह को आकर्षित एवं लोकप्रिय बनाने के उद्देश्य से आज फिल्म स्टार रवि किशन एवं फिल्म निर्माता अभय सिन्हा ने गहन चर्चा की। 
विश्व पटल पर भोजपुरी फिल्मों के प्रचार-प्रसार में सुपर स्टार रवि किशन और सब बड़े एवं समर्पित निर्माता अभय सिन्हा का महत्वपूर्ण योगदान है। 
इस बाबत चर्चा के दौरान सुपरस्टार रवि किशन ने कहा कि मॉरीशस के बाद अब लंदन में भोजपुरी फिल्म इंडस्ट्री का धमाल होगा। यही नहीं दोनों की धारणा है कि भोजपुरी फ़िल्में गंभीर और सामाजिक मुद्दों पर गुणवत्तापूर्ण बनाई जाये।जिससे नेशनल अवार्ड के साथ-साथ अंतर्राष्ट्रीय फ़िल्म फेस्टिवल में भी भोजपुरी फिल्मों को सम्मान मिल सके।

Friday, 6 February 2015

रवि किशन - दमदार भोजपुरिया

रवि किशन - (९)
43 वर्ष, फिल्म - अभिनेता

अद्भुतास अभिनेता



भोजपुरी फिल्मी हीरो की अभिनय की बात की जाय तो रवि किशन का नाम सबसे पहले आता है। हिन्दी फिल्मों से अपनी फिल्मी कैरियर की शुरूआत करने वाले रवि आज हिन्दी के साथ भोजपुरी फिल्मों के चहेते अभिनेताओं में से एक है।

उत्तर प्रदेश के जौनपुर जनपद के केराक तहसिल, विसई गांव के एक पुजारी परिवार में रविन्द्र नाथ शुक्ला उर्फ रवि किशन का जन्म 17 जुलाई 1971 को हुआ था। बचपन से ही फिल्मों के शौकिन रवि किशन ने गांव के रामलीला से अपने अभिनय की शुरूआत की थी। माता पिता के विरोध के बावजूद वो फिल्मों को अपना कैरियर बनाये।

1993 में हिन्दी फिल्म ’उधार की जिनदगी‘में काजोल के पिता के रूप में उन्होंने अपने फिल्मीं सफल की शुरूआत की थी और 2003 में मोहन प्रसाद की पहली भोजपुरी फिल्म ’सइया हमार ’ की और तब से लेकर आज तक 100 से भी अधिक भोजपुरी फिल्में किया हैं, वे भोजपुरी के एकमात्र अभिनेता है जिन्होंने हिन्दी, तमील, तेलुगु और मराठी फिल्मों के साथ-साथ कई टीवी शो भी किया हैै। बिग बाॅस सिजन एक के फाइनल तक पहुंचने वाले रवि किशन देश-विदेश अपने अभियन के लिए जाने जाते हैं।

इसी साल वो अपनी हीट भोजपुरी फिल्म ’पंडितजी बताई ना बियाह कब होई’ का रिमेक लेकर आ रहे हैं।

आलोचनाः 
आम लोगो के बीच कम दिखते है और कांग्रेस के नेता होने के बावजूद अपनी सरकार से भोजपुरी को आठवीं अनुसूची में शामिल कराने में नकाम रहे।