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Saturday, 14 January 2017

भोजपुरी को संविधान की आठवीं अनुसूची की ओर : मनोज तिवारी


नई दिल्‍ली: इंडिया इंटरनेशनल सेंटर में भोजपुरी को संविधान की आठवीं अनुसूची में शामिल करने के साथ ही भोजपुरी साहित्य और आंदोलन के मुद्दे पर खूब जोरदार चर्चा हुई । सांसद और दिल्‍ली भाजपा के अध्‍यक्ष मनोज तिवारी ने कहा कि सरकार ने भोजपुरी को संवैधानिक मान्‍यता देने का मन पूरी तरह से बना लिया है और संसद के अगले सत्र में भोजपुरी की संवैधानिक मान्‍यता संबंधी बिल के संसद में पेश होने की पूरी उम्‍मीद है । इंडिया इंटरनेशनल सेंटर में पत्रिका 'भोजपुरी पंचायत' द्वारा अपने प्रकाशन के पांच वर्ष पूरे होने के अवसर पर आयोजित भोजपुरी साहित्‍यांदोलन कार्यक्रम में मॉरिशस के कला व संस्‍कृति मंत्री पृथ्‍वीराज सिंह रूपन, भारत में मारीशस के उच्‍चायुक्‍त श्री जगदीश्‍वर गोवर्धन, भोजपुरी सिनेस्‍टार, लोकगायक, सांसद एवं भाजपा के दिल्‍ली प्रदेश अध्‍यक्ष मनोज तिवारी, भोजपुरी समाज दिल्‍ली के अध्‍यक्ष अजीत दुबे, सासाराम महाविद्यालय के हिंदी विभागाध्‍यक्ष गुरूशरण सिंह, बिहारी कनेक्‍ट के अध्‍यक्ष उदेश्‍वर सिंह, पूर्वांचल एकता मंच के अध्‍यक्ष शिवजी सिंह की मौजूदगी में सम्‍पन्‍न इस कार्यक्रम में भोजपुरी पत्रकारिता, साहित्‍य, संस्‍कृति, कला व सिनेमा सहित भोजपुरी से जुड़े अनेक मुद्दों पर चर्चा हुई और भोजपुरी को जल्‍द से जल्‍द संवैधानिक मान्‍यता देने की मांग भी की गई ।  लोकगायक, सांसद एवं भाजपा के दिल्‍ली प्रदेश अध्‍यक्ष मनोज तिवारी ने भोजपुरी की मिठास, विस्तार और समृद्धि पर बात करते हुए भोजपुरी पंचायत द्वारा किए जा रहे कार्यों की सराहना करते रहे। उन्होंने बताया की अब वह समय दूर नहीं, जब भोजपुरी संविधान की आठवीं अनुसूची में सम्मिलित कर ली जाएगी। वे 'भोजपुरी-पंचायत' द्वारा किये जा रहे कार्यों से अभिभूत थे। उन्होंने मंच से बोलते हुए कहा कि कुलदीप भाई का कार्य निश्चय ही सराहनीय है। ये पूरी निष्ठा एवं मेहनत से पत्रिका को निकालते हैं। उन्होंने पत्रिका के हर कार्यक्रम में आने का वादा भी किया। 
भोजपुरी समाज दिल्‍ली के अध्‍यक्ष अजीत दुबे ने अपने संबोधन में कहा कि यह गौरव की बात है कि मॉरीशस सरकार ने मॉरीशस में भोजपुरी को संवैधानिक मान्‍यता प्रदान कर रखी है और अब भारत में भी वर्तमान सरकार ने भोजपुरी को संवैधानिक मान्‍यता देने का मन बना लिया है । लेकिन हिंदी के कुछ विद्वान भोजपुरी की संवैधानिक मान्‍यता की राह में रोड़ा अटकाने की कोशिश कर रहे हैं जबकि सच्‍चाई ये है कि भोजपुरी की संवैधानिक मान्‍यता से हिंदी का कोई नुकसान नहीं होने जा रहा है । उन्‍होंने कहा कि भोजपुरी का हिंदी से कोई विरोध नहीं है ।    
इस अवसर पर मॉरीशस के कला व संस्‍कृति मंत्री पृथ्‍वीराज सिंह रूपन तथा भारत में मारीशस के उच्‍चायुक्‍त श्री जगदीश्‍वर गोवर्धन ने भारत और मारीशस के प्रगाढ़ आपसी संबंधों तथा एक समान भाषा, संस्‍कृति, परम्‍परा और  रीति-रिवाजों को याद करते हुए कहा कि हमारी जड़ें भारत में हैं और हमारा सौभाग्‍य है कि हमें यहां पर इतना मान-सम्‍मान प्रदान किया जाता है । 

सासाराम महाविद्यालय के हिंदी विभागाध्‍यक्ष गुरूशरण सिंह ने भोजपुरी के विकास और समृद्धि में पत्र-पत्रिकाओं के योगदानो की चर्चा करते हुए अनवरत रूप से 'भोजपुरी-पंचायत' का निकलना अनुकरणीय और सराहनीय है। बिहारी कनेक्‍ट के अध्‍यक्ष उदेश्‍वर सिंह ने विश्व स्तर पर भोजपुरी के कार्यक्रमों के आयोजनों की चर्चा करते हुए पत्रिका के योगदानों की सराहना करते हुए भोजपुरी के प्रति अपनी प्रतिबद्धता व्यक्त की। पूर्वांचल एकता मंच के अध्‍यक्ष शिवजी सिंह ने बताया कि भोजपुरी केवल भाषा ही नहीं, एक संस्कृति है। विश्व भोजपुरी सम्मलेन के आयोजन द्वारा उनका यही प्रयास रहता है कि भाषा और संस्कृति की समृद्धि हो। इसमें साहित्यिक रूप से चर्चाओं और कवि-सम्मेलनों का आयोजन अनुकरणीय है। इसी क्रम में पत्रकार व 'भोजपुरी संसार' के संपादक मनोज श्रीवास्‍तव ने भी भोजपुरी से जुड़े विभिन्‍न मुद्दों पर अपने विचार रखते हुए भोजपुरी पंचायत की कल्पना और उसके अनवरत सफर पर विषय-परिवर्तन के रूप में विस्तृत जानकारी प्रस्तुत की। सबने अपने-अपने पक्षों द्वारा भोजपुरी साहित्य की समृद्धि और इसके संवैधानिक सम्मान के लिए होते रहने वाले आंदोलनों पर विस्तृत विचार प्रस्तुत किया।
 कार्यक्रम में आये अतिथियों का स्वागत भोजपुरी पंचायत के संपादक कुलदीप श्रीवास्तव ने किया। जहाँ चर्चा सत्र का संचालन प्रो गुरुशरण सिंह ने किया वही बाकी सत्र का सञ्चालन व धन्यवाद ज्ञापन केशव मोहन पाण्डेय ने दिया। केशव मोहन पाण्डेय ने पत्रिका के साहित्यिक पक्ष को प्रस्तुत करते हुए बताया कि पत्रिका में भोजपुरी साहित्य की समृद्धि के लिए लगभग सभी विषयों पर साहित्यकारों के विचारों को प्रस्तुत किया जाता है। इसमें भाषा और संस्कृति के हर पक्ष पर विचार प्रस्तुत किया जाता है। पत्रिका में भोजपुरी साहित्यकारों को भरपूर मौका दिया जाता है और उनके बारे में जानकारी भी प्रस्तुत किया जाता है। 
उक्त कार्यक्रम में भोजपुरी साहित्य और आंदोलन से जुड़े विभूतियों को सम्मानित किया गया। भोजपुरी पंचायत द्वारा आयोजित इस 'साहित्यन्दोलन' कार्यक्रम में प्रो गुरुशरण सिंह, पाती पत्रिका के संपादक और श्रेष्ठ साहित्यकार डॉ अशोक द्विवेदी को, साहित्यकार डॉ जौहर शाफियाबादी को 'साहित्य-रत्न' से सम्मानित किया गया तो प्रसिद्ध व्यवसायी और समाजसेवी डॉ संजय सिन्हा को 'दमदार भोजपुरिया' का सम्मान दिया गया। 'भोजपुरी समाज' के अध्यक्ष अजीत दूबे को 'भोजपुरी-रत्न' से तथा पूर्वांचल एकता मंच के अध्यक्ष शिवजी सिंह को 'पूर्वांचल सम्मान' से सम्मानित किया गया। सम्मान के इसी क्रम में 'बिहारी कनेक्ट' के उदेश्वर सिंह, मधुवेंद्र राय और ज्योतिषाचार्य पं राकेश पाण्डेय, हरि नारायण राय और भोजपुरी संसार के संपादक मनोज श्रीवास्तव को 'भोजपुरी गौरव सम्मान' से सम्मानित किया गया। भारत में मॉरिशस के उच्चायुक्त श्री जगदीश गोवर्धन को 'भारत मॉरिशस मैत्री सम्मान' से सम्मानित किया गया। लोक कलाकार विपुल नायक को 'भिखारी ठाकुर सम्मान' तथा मॉरिशस के कला और संस्कृति मंत्री पृथ्वीराज सिंह रूपं को 'डॉ राजेंद्र प्रसाद सम्मान' से सम्मानित किया गया।

 इस अवसर पर भोजपुरी कवि देवकांत पाण्डेय 'देव', हेलो भोजपुरी के संपादक राजकुमार अनुरागी, अमरेंद्र सिंह, मुकेश सिंह, सुनील सिन्हा, रीता मिश्रा, नरेन्द्र कुमार सिंह - अध्यक्ष बिहारी संस्कृति मंच, लेखक आर के सिन्हा, राकेश परमार, सुजीत कुमार श्रीवास्तव आदि अनेक कवि, लेखक, वकील, अध्‍यापक, समाजसेवी, पत्रकार व अन्‍य बुद्धिजीवी उपस्थित थे ।

Wednesday, 4 February 2015

विश्व का स्वर्ग मॉरीशस

विश्व का स्वर्ग मॉरीशस

भारतीय अप्रवासियों के मारीशस आगमन के 80वीं वर्ष गाँठ के संदर्भ में मॉरीशस सरकार द्वारा आयोजित अंतरराष्ट्रीय भोजपुरी महोत्सव में दुबारा मॉरीशस जाने का मौका मिलासबसे ख़ुशी की बात यह थी कि मैं अपने पत्रकारिता गुरु मनोज श्रीवास्तव के साथ मॉरीशस सरकार द्वारा ऑफिसियल बुलावाया था। इस बार के अपने ९ दिनों के मॉरीशस प्रवास के दौरान मैं उन जगहों पर भी गया जहाँ पिछली बार नहीं जा पाया था और कई जगह तो दुबारा गया और भरपूर टाइम बिताया, और इससे मुझे मॉरीशस को पूरी तरह जानने और समझने का खूब मौका मिला


१८० साल पहले २ नवंबर १८३४ को हमारे पूर्वज गिरिमिटिया बनकर मॉरीशस गएथे और आज अपनी मेहनत और लगन से मॉरीशस को दुनियाका का स्वर्ग बना डाले हैं।पर मॉरीशस में भारतियों का अप्रवासन बहुत ही कठिन एवं चुनौतीपूर्ण समस्याओं से गुज़रा थासरिता बुधु अपने किताब में लिखती हैं कि 'यह जीवित रहने, सफल  होने तथा विपरीत परिस्थितियों में रहकर एक स्वर्ग जैसे सुन्दर टापू के निर्माण करने किदुर्जेय अभिलाषा है, जो पुरे विश्व के लिए आज भी मिशाल के रूप में पेश किया जाताहै


जहा तक मॉरीशस में भोजपुरी भाषा का सवाल है तो यहाँ भोजपुरी इंडिया से अधिक समृद्ध लगती है और यहाँ विद्यालयी स्तर पर भोजपुरी की पढ़ाई होने लगी है। जो भी बच्चे भोजपुरी पढ़ते हैं या जो लोग-बाग भी हैं, वे सभी भोजपुरी के प्रति गंभीर दिखते हैं। भोजपुरी के प्रति उनकी गंभीरता का नजारा इस सम्मेलन में भी देखने को मिला। इसके साथ ही मैंने वहाँ के विद्यालयों में पढ़ाई जानेवाली कुछ किताबें भी लाया हूँ जिन्हें काफी व्यवस्थित और यथार्थपूर्ण रूप से तैयार किया गया है। भोजपुरी को इतने सरल और मधुर तरीके से पेश किया गया है कि बच्चे रूचि लेकर पढ़ सकें और आसानी से समझ सकें। वैसे मॉरीशस में दैनिक जीवन में लोगों  कासंपर्क तीन भाषाओं से होता है, फ्रेंच, क्रिओल औरभोजपुरी से। यहाँ फ्रेंच भी क्रिओल और भोजपुरी से थोड़ी प्रभावित दिखती है पर जहाँ तक भोजपुरी की बात है तो इसके बहुत कम शब्द यहाँ बोली जाने वाली फ्रेंच और क्रिओल में मिलते हैं। वैसे यहाँ मूल भोजपुरी भाषियों के साथ ही अन्य प्रांतों से आने वाले अप्रवासी भी पहले भोजपुरी ही बोलते थेक्योंकियहाँ उस समय हर बस्तीया गावों में भोजपुरी-भाषियों का ही बहुमत था और वैसे भी भोजपुरी इतनी मधुर व सरल भाषा है कि सब इसे बोलना चाहते हैं। परंतु आज स्थिति थोड़ी बदल गई है और अब यहाँ के लोग-बाग वैसे ही भोजपुरी से थोड़ा दूर होते जा रहे हैं जैसे भारत में कुछ भोजपुरी भाषी, भोजपुरी अगुवा, नेता, संभ्रांत भोजपुरिया भोजपुरी से कन्नी काटते नजर आते हैं। अब मॉरीशस में भी लोग क्रिओल, फ्रेंच और अंग्रेजी पर ही ज्यादा ध्यान देने लगेहैं। जो बहुत ही सोचनीय है।

मुझे  मॉरीशस में कई बातें बहुत ही महत्वपूर्ण लगीं और बरबस ही मेरा ध्यान इधर चला गया। यह ध्यान देने वाली बात है कि मॉरीशस में ६० प्रतिशत से भी अधिक जन संख्या भारतीय मूलकी है। यह भी सत्य है कि भारत के सबसे गरीब लोग ही गिरिमिटिया मजदूर बनके मॉरीशस आये थे और आज वे अपनी ईमानदारी, कर्तव्यनिष्ठा के बल पर इतने आगे निकल गए हैं कि ऐसा लगता ही नहीं के ये लोग गिरमिटिया मजदूर की संताने हैं। एक सबसे महत्वपूर्ण और विचारणीय बात यह भी है कि यहाँ ऊँच-नीच, जाति-पाति का भेदभाव नहीं है और ना ही आरक्षण ही है और न इसके लिए मारामारी व राजनीति। यहाँ पर शिक्षा व चिकित्सा सुविधाएँ निश्शुल्क हैं तथा साथ ही यहाँ हर बच्चे को शिक्षा लेना अनिवार्य है, अगर बच्चा शिक्षा ग्रहण नहीं करता तो उसके घर पर पुलिस आ जाती है और माता-पिता को फाइन भरना पड़ता है।बुजुर्गों को पेंशन की सुविधा है। मॉरिशस सरकार की इन गतिविधियों को देखकर लगा कि अपने ही लोग इस देश को किस तरक्की पर पहुँचा दिए हैं और यहाँ के अपनों के लिए कितना कुछ कर दिए हैं। वहीँ एक ओर हम लोग हैं जो आज भी ऊँच-नीच, जाति-पाँति में उलझे हुए हैं। जितना समय हम अपने विकास पर नहीं देते उससे अधिक हमारा समय समाज व देश में फैली कुरीतियाँ बर्बाद कर देती हैं। गौर से देखने पर हम अपने को मॉरीशस से भी ५०  साल पीछे पाते हैं और ऐसे में भी अगर आज यही मॉरीश ससरका की मारी सरकार से उम्मीद करती है कि मोदी जी मॉरीशस को मेट्रो की सौगात देंगे... तो यह बहुत ही हास्यास्पद लगता है?
Left udeshwar Singh, Mauritius Presiden, Kuldeep Kumar and Mr Mukeshar Choonee at Mauritius


जो भी हो,मॉरीशस सरकार ने भारतीय अप्रवासियों के मारीशस आगमन के 180वीं वर्ष गाँठ के संदर्भ में अंतरराष्ट्रीय भोजपुरी महोत्सव का सफल आयोजन कर इतिहास तो रच ही  दियाहै। भारत में केंद्र या राज्य सरकारों द्वारा इस तरह के आयोजन हमने आज तक नहीं देखा है, जिसमें कोई सरकार इतने बड़े स्तर पर अपनी भाषा, संस्कृति एवं संस्कारों पर जोर देती दिखी हो। इसमें कोई दोराय नहीं कि मॉरीशस सरकार का यह अभूतपूर्व आयोजन भोजपुरी भाषा और  साहित्य के साथ ही संस्कृति के प्रसार-प्रचार  मेंमील का पत्थर साबित होगा और इससे हमारी भाषा, संस्कृति को एक नई दिशा व ऊँचाई मिलेगी। एक बात और हम भारतीय भोजपुरियों को मारिशसवासी भोजपुरियों से बिना शर्म किए सीखने की जरूरत है, उनके कार्यों, व्यवहारों को अपनाने की जरूरत है। अगर सँच कहूँ तो वे लोग हम लोगों से हर क्षेत्र में आगे हैं।

हम लोग शिष्टाचार भी भूलते जा रहे हैं। नाम व दाम पाने के लिए हम काफी हदतक गिर जाते हैं, न ही प्रोटोकॉल की परवाह करते और ना ही अपने बड़े-बुजुर्गों की। हम जहाँ भी जाते हैं, बस इसी अभिलाषा से जाते हैं कि हमें सम्मानित किया जाए। हम कभी मंच से बाहर रहकर काम करने में विश्वास नहीं करते अपितु मंच पर आसीन होने के लिए धक्का-मुक्की करते नजर आते हैं। अगर मंच पर पधारने हेतु संचालक हमारे नाम पुकारने में देरी करता है तो हम खुद ही बिना बुलाए मंच पर पहुँच जाते हैं, ये कैसी सभ्यता? यह कैसी शिष्टता?इतना ही नहीं हम हद तो तब कर देते हैं जब फोटो खिंचवाने के लिए धक्का-मुक्की कर देते हैं और उस सम्मानित व्यक्ति को भी पीछे कर देते हैं, जिसके साथ हमें फोटो खिंचवाना होता है। इस सब बातों पर ध्यान देना आवश्यक है।
अंत में मैं इस सफल आयोजन के लिए करबद्ध होकर मॉरीशससरकार, डॉ. सरिता बुधु जी एवं श्री अरविन्द बिसेसर जी को धन्यवाद देता हूँ.... जयभोजपुरी! जय मारिशस!


वादों का हवाई किला

वादों का हवाई किला

देशवासियों के मन में एक ही सवाल- दिल्ली का सीएम कौन? इसका जवाबदेना मुश्किल है। सटोरियों की माने तो बीजेपी की जीत पक्की है। लेकिन सर्वे अलग-अलग संभावनाएं जता रहे हैं। कुल मिलाकर यह चुनाव भाजपा एवं आम आदमी पार्टी के बीच कड़ी टक्कर का संकेत दे रहा है। कांग्रेस तो इस लड़ाई में कहीं दूर-दूर तक भी नजर नहीं आ रही पर यह हो सकता है कि कहीं यह भाजवा व आप के गले की हड्डी न बन जाए और इन दोनों का खेल भी न बिगाड़ दे। क्योंकि अब समय फिर से करवट लेने लगा है और यह वही कांग्रेस है जो पिछले लगातार 15 वर्षों तक दिल्ली की बागडोर संभालते हुए दिल्ली की तश्वीर बदलकर रख दी है। मेरे हिसाब से, अन्य प्रांतों की तुलना में कांग्रेस सरकार ने दिल्ली में सबसे ज्यादा काम किया था। अगर तत्कालीन केंद्र सरकार घोटाले और कॉमनवेल्थ गेम घोटाले नहीं हुए होते तो दिल्ली कांग्रेस फिर से दिल्ली के तख्त पर विराजमान होती और अभी इस चुनाव से जनता के साथ ही पार्टियों को द-चार नहीं होना पड़ता। पर तत्कालीन केंद्र सरकार के घोटाले, शीला सरकार के विकास को लील गए और शीला सरकार की सारी मेहनत इन घोटालों की बलि चढ़ गई तथा इसे के चलते एक नई पार्टी यानी आम आदमी पार्टी की उपज हुई।

केजरीवाल एण्ड कंपनी द्वारा जारी घोषणा पत्र मात्र एक छलावा लगता है। सपनों में भी इन्हें पूरा करना मुमकिन नहीं दिखता। दिल्ली का कुल बजट 40000 हजार करोड़ का है और आपका बजट लगभग 12 लाख करोड़ का। अब सबसे अहम सवाल यह उठता है कि इतना पैसा कहाँ सेलाएगीआप’? किसी के भी यह समझ से परे हो सकता है कि केजरीवाल सरकार कैसे चलाएंगे। बिजली सस्ती कर देंगे, पानी फ्री कर देंगे, 15 लाख सीटीवी लगवाएंगे, भईइसके लिए पैसा चाहिए और वह पैसा आप कहाँ से लाओगे, जरा इस पर भी तो प्रकाश डाल दो? आज के समय में पार्टियों को वादे करना बहुत ही आसान लगता है पर जब पूरा करने की बात आती है तो तो तमाम कठिनाइयों को बताकर अपना पल्ला झाड़ लेते हैं।यह घोषणा पत्र केजरीवाल एंड कंपनी के साथ ही दिल्ली जनता के लिए मात्र एक छलावा ही है। सब्सिडी की भी एक सीमा होती है और इसके लिए भी पूर्व तैयारी, धन आदि की जरूरत होती है, आखिर ये नेता, पार्टियाँ बिना सोचे-समझे ऐसे-ऐसे दावे क्यों कर देती हैं, जो कभी पूरा ही नहीं हो सकते। क्या इन नेताओं, पार्टियों के पास चुनाव के समय कोई जादू की छड़ी आ जाती है?केजरीवाल ने जो-जो वादे किए हैं, वो पांच साल तो क्या बीस सालों में भी हो जाए तो किसी चमत्कार से कम नहीं होगा! जब वादों का मौसम हो तो बीजेपी पीछे क्यों रहे। वह भी तो वादे-पर-वादे करती जा रही है। मोदी ने कहा है कि उनका एक सपना है कि2022 तक हर झुग्गीवाले के पास एक पक्का घर हो और इसी सपने को पूरा करने के लिए वह दिल्लीवालों से वोट मांग रहे हैं। यह सपना कुछ हद तक संभव तो हैं पर करना मुश्किल है।

बीजेपी की सीएम उम्मीदवार किरण बेदी ने महिलाओं के सुरक्षा के लिए अपना ब्लू प्रिंट जारी किया है। किरण बेदी कह रही हैं कि महिलाओं को सुरक्षा देगी लेकिन यह तो दिल्ली की महिलाएं और लड़कियां ही जानती हैं कि बीजेपी सरकार आने के बाद छेड़छाड़ की घटनाएं कितनी कम हुईं हैं? इसी तरह करप्शन खत्म करने का वादा कर रही है बीजेपी, लेकिन एमसीडी में तो उसी का राज है - क्या एमसीडी में भ्रष्टाचार खत्म हो गया है? क्या नक्शे बिना पैसा दिए पास होने लगे हैं? क्या पुलिसवालों ने, जो सीधे मोदी सरकार के अधीन हैं, रिश्वत लेना बंद कर दिए हैं? आप किसी भी व्यापारी, किसी भी ऑटोवाले, किसी भी रेहड़ी-पटरीवाले से पूछ लीजिए, वह बता देगा कि एनडीए सरकार आने के बाद भी हफ्तावसूली कैसे पहले की ही तरह चल रही है। मोदी सरकार ने केन्द्र में भले ही कुछ सुधार किया होपर दिल्ली प्रदेश में भ्रष्टाचार व रिश्वतखोरी पर रोक लगा पाने में विफल रही है।


एक तरफ केजरीवाल के साथ ऑटो वाले, पान वाले, गरीब हैं, निम्न-मध्यमवर्गीय लोग हैं, यूथ हैं तोवहीं बीजेपी के साथ मध्यमवर्गीय परिवार, उच्चवर्गीय एवं युवा वोटों के साथ व्यापारियों कातबका है। अगर इस बार कांग्रेस अपने पिछले विकास कार्यों के बल पर और हाल में दिल्ली में हुए उथल-पुथल को मुद्दा बनाते हुए अपनी रणनीतिक स्थिति मजबूत करअपने वोटों में इजाफा कर पाती है और पिछले चुनाव के मद्देनजर4-5 प्रतिशत भी अधिक ला पाती है तो आपको बड़ा नुकसान उठाना पड़ जाएगा और बीजेपी की बल्ले-बल्ले हो जाएगी क्योंकि कांग्रेस दिल्ली में जितनी मजबूत होगी, उतना ही फायदा दिल्ली बीजेपी को होगा, क्योंकि मोदी के पीएम बनने के बाद दिल्ली में भी काफी ओट बीजेपी के पक्ष में सुरक्षित दिख रहा है और इसमें सेंध लगा पाना अभी मुश्किल लग रहा है।अब 10 फरवरी को क्या रिजल्ट आता हैं यह देखना दिलस्पत होगा। यह चुनाव प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के लिए भी प्रतिष्ठा का चुनाव बन पड़ा है तभी तो भाजपा अध्यक्ष अमित शाह खुद ही चुनाव की कमान संभाल रहे हैं और वरिष्ठ भाजपा नेता दिल्ली की गलियों में दिख रहे हैं। खैर अंत में यह भी कहना लाजिमी है कि भोजपुरिया समाज की इस चुनाव में भी प्रमुख भूमिका होगी और ये जिधर जाएंगे, दिल्ली के शासन को भी उधर ही जाना होगा।

Kuldeep Srivastava