Friday, 13 February 2015

मानसून-सत्र में भोजपुरी को मान्यताः मनोज तिवारी


एक साल बाद फिर से दिल्ली विधान सभा का चुनाव 7 फरवरी को होने जा रहा है, पिछले चुनाव में पिछली बार किसी पार्टी को बहुमत नहीं मिला था. इस बार केंद्र में सरकार बना चुकी भाजपा और आम आदमी पार्टी दोनों दिल्ली में सरकार बनाने का दावा कर रही हैं और दोनों में कांटे की टक्कर चल  रहा है. पिछले चुनाव में आप को पूर्वांचलियांे ने पूरा सपोर्ट किया था. इसी को देखते हुए भाजपा ने भोजपुरी फिल्मों के अभिनेता-गायक और नार्थ ईस्ट दिल्ली के संसद मनोज तिवारी को पूर्वांचली वोटों का ध्रुर्वीकरण के लिए लगाया है और मनोज इस काम में लग भी गए  है. अभिनेता  से राजनेता बने मनोज बड़ी तेजी से राजनेता के रूप में लोकप्रिय हो रहे है. तभी तो झारखण्ड चुनाव में प्रधानमंत्री के बाद मनोज तिवारी की सबसे ज्यादा मांग थी, और मनोज ने सबसे ज्यादा 42 जनसभाएं की और झारखण्ड बनने के बाद पहली बार पूर्ण बहुमत की बीजेपी सरकार बनी है. अब दिल्ली की बारी है.  हाल ही में संसद मनोज तिवारी से भोजपुरी पंचायत ने बातचित किया। प्रतुस्त है बाचीत का प्रमुख अंशः

भोजपुरी कब तक आठवी अनुसूची में शामिल होइ? 
पांचवा सत्र में !

पाचवा सत्र यानी मानसून सत्र में?
हाँ

बिहार चुनाव के पहले?
हँसे, नहीं में ये शुरू की कह रहा हूँ कि 2015 में भोजपुरी को संवैधानिक मान्यता मिल जाएगी। हमारी जिम्मेदारी है कि भोजपुरी को जल्द से जल्द आठवी अनुसूची में शामिल कर लिया जाए.  प्रधानमंत्री मोदी जी एवं गृहमंत्री जी बहुत गंभीर है.

अभिनेता से सांसद बने लोगो का ट्रैक रिकाॅर्ड अच्छा नहीं रहा है, वो काम नहीं करते, आपने अपने ७ महीने में क्या काम किया है?
मैंने अब तक 586 करोड़  का काम कराया रहा हूँ, इनमें से कई काम पूरा हो चुका हैं और कई काम बड़ी तेजी से हो रहे हैं। 277  करोड़ का पावर स्टेशन बन चुका है, हर्षविहार में जिसका उत्घाटन अरुण जेटली जी एवं पियूष गोयल जी किया। 100 से 125 करोड़  का सीवर, रोड, पार्क आदि का काम भी कम्पलीट हो चुका है.

इसके अलावे जो कोंग्रेस सरकार और आम आदमी के समय से रुका हुआ कई काम पड़ा था उसको फण्ड मुहैया कराकर तेजी से पूरा करवाया, जो 1500 करोड़ से ऊपर का है, उसमे 586 करोड़ का काम जोड़ देंगे तो ये 2000 हजार करोड़ का आँकड़ा पार कर जाएगा. जो ७ महीने में रिकार्ड काम करने की कहानी बयान कर रहा है.

दिल्ली चुनाव में आम आदमी से भाजपा को कड़ी ठक्कर मिल रही हैं, भाजपा की क्या रणनीति हैं?
ऐसा कुछ नहीं हैं, चुनाव के बाद आम आदमी पार्टी ‘आठ आदमी पार्टी’ बनकर रह जाएगी। क्योंकि
किरण बेदी के नेतृत्व में भाजपा सरकार बनाने जा रही हैं।

Monday, 9 February 2015

स्वाती पाण्डेय - दमदार भोजपुरिया

स्वाती पाण्डेय - (50)
28 वर्ष, गायन - अंतरराष्ट्रीय

संगीत के साधिका



स्वस्ति पाण्डेय के भोजपुरी लोक संगीत और संस्कृति के विश्व स्तर पर प्रचार प्रसार में योगदानः ’गंगा जी के पनिया झलमल, नइया लागेला किनार’ - अमेरिका के प्रशांत महासागर के पश्चिमी तट, भोर भिनसार के अरघ के बेरा, आ ओह पर गूँजत छठी माई के गीत। लहरन के आवाज के चीरत, हाड़ कपकपाने आला सीत के जीतत, यह आवाज हैे भोजपुरिया माटी के दमदार बेटी, स्वस्ति पाण्डेय का हैं। 

संगीत के साधिका के साथ बहुमुखी प्रतिभा के धनी, स्वस्ति पाण्डेय के जन्मस्थली आरा के महाराजा हाता है। तो इनका कर्मस्थली अमेरिका के कैलिफोर्निया राज्य में अवस्थित सैन होजे नगर है। बाबूजी, डाॅ. कपिल देव पाण्डेय (हिंदी के प्राध्यापक, जैन काॅलेज आरा) के स्नेहिल छाया असामयिक निधन के कारण बचपन में ही उठ गया था। इससे उनकी किशोरावस्था बड़ी विषम परिस्थिति में बिता था। माताजी (श्रीमती शुभा पाण्डेय) जीवन के उस विशम समय को बड़ी चुनौती के साथ डट के मुकाबला की और स्वस्ति के पठन पाठन पर किसी तरह का कोई प्रतिकूल प्रभाव नही पड़ने दिया। विद्याध्ययन के साथ-साथ खेलकूद, एनसीसी आ विशेषकर संगीत, में उत्कृष्टता हासिल करने के लिए निरंतर प्रेरित करती रही।

महेन्द्र प्रताप सिंह - दमदार भोजपुरिया

महेन्द्र प्रताप सिंह - (49)
62 वर्ष, रंगमंच

रंगकर्मी



रंगश्री के संस्थापक महेन्द्र प्रताप सिंह विश्व भर में अपने नाटक के मंचन के लिए जाने जाते हैं। रंगश्री भोजपुरी रंगमंच को समर्पित एक नाट्य संगठन हैं जो भोजपुरी नाटकों को सालो भर विभिन्न जगहों पर मंचन करता रहता हैं, जिससे समाज में जागरूता आए। रंगश्री समाज के बुराइयांे पर कटाक्ष करती हुई नाटकों का मंचन करता है। महेन्द्र प्रताप भोजपुरी के शेक्सपियर भिखारी ठाकुर के विरासत को जींदा रखने के लिए कठिन परिश्रम करते हुए नजर आते हैं। 31 जुलाई 1952 को भोजपुर जिले के चंदी गांव में महेन्द्र प्रताप सिंह का जन्म हुआ था। 

वे अब तक दो भोजपुरी नाटक ‘कटोच’ और ‘बिरजू के बियाह’ लिख चुके है। ‘बिरजू के बियाह’ दहेज प्रथा पर चोट करती हुई नाटक हैं, जो काफी लोकप्रिय नाटक हैं।

अंजना सिंह - दमदार भोजपुरिया

अंजना सिंह - (48)
24 वर्ष, फिल्म


हाॅट केक


भोजपुरी की हाॅट केक कही जाने वाली अभिनेत्री अंजना सिंह की बादशाहत लगातार तीसरे साल भी जारी है। पिछले दो साल में सर्वाधिक फिल्मो करने वाली अंजना  की  इस साल भी बाॅक्स आॅफिस पर सर्वाधिक फिल्मे रिलीज हुई। भोजपुरिया बाॅक्स ऑफिस पर साल 2014 में दस्तक देने वाली  पहली फिल्म करे ला कमाल धरती के लाल और आखिरी फिल्म लाल दुपट्टे वाली, इन दोनों ही फिल्मो में अंजना मुख्य भूमिका में थी।  इस दोनों ही फिल्मो के  बीच अंजना की सभी बड़े कलाकारों के साथ दस और फिल्मे रिलीज हुई। पिछले तीन सालों में अंजना सिंह ने रिकार्ड कुल 36 फिल्में की हैं, और फिल्म सेक्शन में अंजना के लिए ही सबसे ज्यादा वोट आए।

7 अगस्त 1990 को उत्तर प्रदेश के बहराइच जिले में अंजना का जन्म हुआ। चार भाई-बहनों में अंजना दूसरे नंबर की थी। बहराइच से स्कुली शिक्षा ग्रहण करने के बाद अंजना लखनऊ आ गई और उसी साल वो मिस लखनऊ प्रतियोगिता में दुसरे नंबर पर रहीं। फिर क्या था वो मुंबई आ गई और भोजपुरी फिल्मों की सबसे डिमांडिग अभिनेत्री बन गई।

आलोचनाः
ज्यादा अंगप्रर्दशन करती हैं।

संजय कु. तिवारी - दमदार भोजपुरिया

संजय कु. तिवारी - (47)
46 वर्ष, उद्योगपति, अतरराष्ट्रीय

दिलदार



भारत के बारह जाकर जाॅब करना और फिर अपनी बिजनेश करना, यह किसी भारतीय और भोजपुरियों के लिए किसी करिश्में से कम नहीं हैं। पेशे से इंजीनियर संजय कुमार तिवारी दो दशक पहले गल्फ में जाॅब करने गये संजय आज एक बड़ी कंपनी के मालिक है। जब उन्होंने जाॅब छोड़ी तो वो एक मल्टीनेशनल कंपनी में जेनरल 
मनेजर’ के पद पर थे। उनकी कंपनी ‘नेशनल स्टोन  ’में लगभग 200 लोग काम करते हैं उनसे से अधिकतर बिहारी ही है। संजय सिवान जिले के तितरा गांव के हैं, अपनी पढ़ाई उन्होंने रांची से की हैं।

मो. इरसाद - दमदार भोजपुरिया

मो. इरसाद -  (46)
39 वर्ष, अंतरराष्ट्रीय

भोजपुरी के स्टार प्रचारक


मोहम्मद इरसाद सिदिकी, समाजिक, मसकट, ओमान इरसाद भाई गल्फ देशों में और खासकर मसकट में भोजपुरी भाषा और संस्कृति के विकास में वषों से लगे है और काफी हद तक गल्फ में भोजपुरी स्थापित में सफल भी रहे है।

कुशीनगर के लक्षमीपुर गाँव निवासी मो. इरसाद विश्व में भोजपुरी के सेवक रूप में  काफी लोकप्रिय है, उन्होंने भोजपुरी माँ की सेवा के साथ ही अपने इराके के बहुत सारे गायको को अंतरराष्ट्रीय मंच मुहैया कराया है। देश के लगभग सभी नामचिन भोजपुरी गायकों एवं समाजिक कार्यकत्ताओं को मसकट में भोजपुरी मंच पर उनका सम्मान बढ़ाया है।

इरसार एक क्रिकेट खिड़ाली के साथ एक क्रिकेट कोच की भूमिका मसकट के टीम के लिए बखूबी निभा रहे है। वे पेश्ेावर क्रिकेट कोच है जो आॅस्टेलिया और पाकिस्तान से लेवल 2 की कोचिंग की कोर्स किए है। इसाद ने दश के कई हजार लोगों को रोजगार दिलाने में मदद की है और करते रहते है, हर साल हजारों भोजपुरियों को वे रोजगार गल्फ देश में दिलाते है। मो. इरसाद के समाजिक कार्य को देखते हुए उनको कई सम्मान से सम्मानित किया गया है।

आलेाचनाः 
अपनी भावनाओं को छुपा नहीं पात हैं, जिसके चलते लोगो को लगता हैं कि वो बोलते ज्यादा हैं।

राजेन्द्र प्रसाद सिंह - दमदार भोजपुरिया

राजेन्द्र प्रसाद सिंह - (45)
49 वर्ष, शिक्षा


भाषा वैज्ञानिक



डाॅ. राजेन्द्र प्रसाद सिंह भोजपुरी के प्रमुख भाषा वैज्ञानिक एवं आलोचक हैं। पूर्वोत्तर भारत की भाषाओं पर सम्पूर्ण रूप से काम करनवाले वे हिंदी के पहले भाषावैज्ञानिक हैं। उन्होंने एक साथ पंचानवे भाषाओं का शब्दकोष संपादित किया है। वे ऐसे पहले आलोचक हैं जिन्होंने हिंदी साहित्य में सबाल्टर्न अध्ययन का सूत्रपात किया। भोजपुरी में दलित चेतना को रेखांकित करनेवाले भी वे पहले आलोचक हैं। साथ ही भोजपुरी का पहला त्रिभाषी कोष का संपादन करने का श्रेय भी उन्हें प्राप्त है। 

भोजपुरी माटी में एक से बढ़कर एक सपूत दिए हैं जिनमें डाॅ. राजेन्द्र प्रसाद सिंह अंतरराष्ट्रीय पर भोजपुरी भाषा की विशेषता एवं उपयोगिता को स्थापित करने में अतुलनीय योगदान दिया है।

डाॅ. राजेन्द्र प्रसाद सिंह का जन्म रोहताह जिले के अरंग गांव में 5 नवबंर 1965 को हुआ था। शांति प्रसास जैस महाविद्यालय में राजेन्द्र प्रसाद हिन्दी के प्रोफेसर हैं।